👥 मुख्य किरदार:
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👩 रिया मेहरा – 32 वर्षीय आईटी इंजीनियर, प्रेग्नेंट महिला, जो अपने लापता पति की तलाश में दिल्ली आती है।
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👮 कबीर खान – दिल्ली पुलिस का ईमानदार इंस्पेक्टर, जो रिया की मदद करता है।
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👩🦱 समीरा शेख – रिया की पुरानी दोस्त, जो NGO चलाती है।
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💼 विक्रम अरोड़ा – रहस्यमयी बिज़नेसमैन, जिसका नाम अरुण से जुड़ा है।
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👨 अरुण मेहरा – रिया का पति, जो अचानक गायब हो गया।
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👨✈️ डीसीपी रघुवीर सिंह – सीनियर पुलिस अफसर, जो रहस्यमय ढंग से केस को दबाने की कोशिश करता है।
📖 अध्याय 1: गुमशुदगी की दस्तक
रिया मेहरा ट्रेन से उतरती है — दिल्ली स्टेशन की भीड़, शोर और धक्का-मुक्की। पेट पर हाथ रखते हुए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। उसके दिल में एक ही सवाल है: “अरुण कहाँ है?”
फोन बार-बार मिलाने पर भी एक ही जवाब आता है — “स्विच ऑफ है।”
प्लेटफ़ॉर्म पर खड़ी होकर वह नोटिस करती है — अरुण के भेजे पते पर कोई भी नहीं जानता कि वह कौन है।
📖 अध्याय 2: दिल्ली की भीड़ में अकेली रिया
पुराने दिल्ली के गलियारों में वह अरुण की तलाश करती है। हर गली में अनजान चेहरे, हर मोड़ पर खतरे का आभास।
पेट्रोल पंप से लेकर चाय की दुकान तक — सब कहते हैं कि उन्होंने अरुण को नहीं देखा।
लेकिन एक बूढ़ा रिक्शावाला अचानक कहता है: “क्या वो लंबा आदमी था? जिसने पिछले हफ्ते करोल बाग में ठहराव किया था?”
रिया की आँखों में उम्मीद की किरण चमक उठती है।
📖 अध्याय 3: कबीर खान की एंट्री
थाने में जाते ही उसकी मुलाक़ात इंस्पेक्टर कबीर खान से होती है।
कबीर सख्त आवाज़ में पूछता है:
👮: “मैडम, आपके पति दिल्ली क्यों आए थे? और आप अचानक क्यों पहुँची हैं?”
रिया हल्की मुस्कान के साथ:
👩: “क्योंकि मैं सिर्फ़ पत्नी नहीं… एक माँ भी बनने वाली हूँ। और मेरे बच्चे को उसके पिता चाहिए।”
कबीर पहली बार रिया की आँखों में छुपे डर और हिम्मत दोनों देखता है।
📖 अध्याय 4: परछाइयों का पीछा
रिया को अरुण की लैपटॉप बैग एक पुराने होटल से मिलती है। अंदर से फाइलें, नकली दस्तावेज़ और एक रहस्यमयी पेनड्राइव निकलती है।
हर दस्तावेज़ विक्रम अरोड़ा की कंपनी की ओर इशारा करता है।
लेकिन रिया का पीछा भी हो रहा है — रात को वह नोटिस करती है कि एक बाइक सवार हर जगह उसका पीछा करता है।
📖 अध्याय 5: झूठ का जाल
रिया अपनी पुरानी दोस्त समीरा से मिलती है, जो उसे NGO ऑफिस बुलाती है।
समीरा उसे कहती है:
👩🦱: “रिया, अरुण किसी बहुत गहरे खेल में फँस चुका है। उसके दुश्मन सिर्फ़ बिज़नेसमैन नहीं, पुलिस के बड़े अफसर भी हैं।”
रिया चौंक जाती है।
वहीं दूसरी ओर, कबीर भी पाता है कि डीसीपी रघुवीर सिंह इस केस को बार-बार दबाने की कोशिश कर रहा है।
📖 अध्याय 6: पेनड्राइव का राज़
कबीर और रिया पेनड्राइव खोलते हैं।
उसमें डेटा है — करोड़ों रुपये का साइबर स्कैम, जिसमें विक्रम अरोड़ा और डीसीपी रघुवीर सिंह का नाम साफ़ लिखा है।
रिया धीरे से कहती है:
👩: “तो अरुण इसी सच को उजागर करना चाहता था… और इसी लिए गायब हो गया।”
📖 अध्याय 7: दोस्ती का धोखा
रिया को पता चलता है कि समीरा ही गद्दार है।
उसने विक्रम के लिए काम किया और अरुण की जानकारी उन्हें दी।
रिया का दिल टूट जाता है।
👩: “तुमने मेरे अरुण को क्यों फँसाया?”
समीरा ठंडी हँसी के साथ:
👩🦱: “क्योंकि पैसे और ताक़त ही असली रिश्ते हैं, रिया।”
📖 अध्याय 8: शिकारी और शिकार
कबीर, रिया और अरुण (जो अब सामने आता है) एक साथ विक्रम के नेटवर्क को खत्म करने का प्लान बनाते हैं।
अरुण छुपकर जी रहा था, लेकिन अब वह सामने आकर लड़ने को तैयार है।
रात में पुरानी फैक्ट्री में गोलीबारी होती है — कबीर और अरुण मिलकर विक्रम के हथियारबंद लोगों को हराते हैं।
📖 अध्याय 9: अंतिम भिड़ंत
UN Cyber Summit के दिन, विक्रम अपनी डील पक्की करने वाला होता है।
तभी रिया स्टेज पर पहुँचती है और पेनड्राइव सबके सामने रख देती है।
कबीर पुलिस टीम लेकर विक्रम और डीसीपी रघुवीर को गिरफ्तार करता है।
सारा सच उजागर हो जाता है।
📖 अध्याय 10: अदृश्य सच
रिया अस्पताल में अपने बच्चे को जन्म देती है।
अरुण उसके पास है।
लेकिन आखिरी सीन में कैमरा अरुण के लैपटॉप पर जाता है —
जहाँ एक नई फाइल खुलती है: “Project Black Shadow – Top Secret”
यानि, कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है…
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