भाग 1: खुशियों भरा घर
रमन का परिवार शहर के शांत इलाके में रहता था। एक प्यारा सा घर, जिसमें उसकी पत्नी कावेरी, बेटी श्रेया और बेटा अंशु रहते थे। रमन और कावेरी की शादी को पंद्रह साल हो चुके थे। श्रेया बारह साल की थी, पढ़ाई में होशियार और नृत्य में निपुण। अंशु आठ साल का नटखट लड़का था, जो घर में हर समय शोर मचाता रहता।
रमन एक सरकारी दफ्तर में काम करता था। वह अक्सर देर तक काम करता ताकि अपने परिवार के लिए अच्छा जीवन दे सके। घर में हमेशा हंसी-खुशी का माहौल रहता। कावेरी घर संभालने में माहिर थी और बच्चों के साथ बहुत प्यार करती थी।
भाग 2: एक चिट्ठी
एक दिन, रमन को दफ्तर में एक चिट्ठी मिली। चिट्ठी देखकर वह चौंक गया। यह किसी छोटे से कस्बे से आई थी। चिट्ठी में लिखा था —
*”प्रिय रमन जी,
मैं बीमार हूं और ज्यादा दिन जीवित नहीं रहूंगी। हमारे बेटे की देखभाल अब आप ही कर सकते हैं। वह अब नौ साल का हो गया है। उसे लेने आ जाइए।
नीलम”*
रमन के हाथ कांपने लगे। नीलम उसकी ज़िंदगी का वो अध्याय थी, जिसे उसने कभी कावेरी को नहीं बताया। कई साल पहले, जब वह नौकरी के लिए नए शहर गया था, वहां उसकी मुलाकात नीलम से हुई थी। नीलम विधवा थी और अकेली रहती थी। रमन और नीलम के बीच कुछ महीनों तक संबंध रहे, लेकिन नौकरी के बाद वह लौट आया और नीलम से संपर्क टूट गया।
उसे नहीं पता था कि नीलम के गर्भ में उसका बच्चा पल रहा था।
भाग 3: कस्बे की ओर
रमन अगले ही दिन छुट्टी लेकर कस्बे पहुंचा। वहां, एक पुराने से मकान में नीलम बिस्तर पर लेटी थी। वह बहुत कमजोर हो चुकी थी। उसके पास एक दुबला-पतला लड़का खड़ा था, जिसकी आंखें बिल्कुल रमन जैसी थीं।
नीलम ने धीमी आवाज़ में कहा —
“इसका नाम मानव है। अब यह तुम्हारा जिम्मा है। इसे यहां मत छोड़ना…“
इतना कहकर उसने आंखें बंद कर लीं। रमन के लिए यह पल बहुत भारी था। उसने मानव का हाथ थाम लिया और उसे अपने साथ घर ले आया।
भाग 4: अजनबी बच्चा
घर पहुंचते ही माहौल बदल गया। कावेरी और बच्चे पहले तो हैरान हुए कि रमन किसे साथ लाया है। रमन ने कोई वजह नहीं बताई और बस इतना कहा —
“यह कुछ दिन हमारे साथ रहेगा।”
कावेरी थोड़ी नाखुश तो हुई, लेकिन उसने मानव के लिए एक कोना तैयार कर दिया। मानव बहुत चुपचाप रहता। बच्चों के साथ खेलता भी नहीं, बस खिड़की के पास बैठा रहता।
श्रेया और अंशु पहले तो उसे अजीब समझते रहे। लेकिन धीरे-धीरे अंशु ने मानव से दोस्ती कर ली। दोनों एक साथ पतंग उड़ाते, क्रिकेट खेलते और स्कूल का होमवर्क करते।
भाग 5: सच्चाई का सामना
कावेरी को धीरे-धीरे शक होने लगा। वह देख रही थी कि रमन मानव के लिए कुछ ज़्यादा ही फिक्रमंद रहता है। एक रात, जब रमन ऑफिस से लौटा, तो उसने साफ-साफ पूछ लिया —
“ये बच्चा कौन है? सच-सच बताओ।”
रमन चुप रहा। फिर उसने सारा सच बता दिया। कावेरी सुनकर सन्न रह गई। उसकी आंखों में आंसू आ गए। वह रात भर रोती रही।
अगले दिन उसने रमन से कहा —
“तुम्हारी गलती की सजा इस मासूम को क्यों मिले? लेकिन मुझे वक्त चाहिए।”
कावेरी मानव से अब भी थोड़ी दूरी बनाकर रखती, लेकिन उसने कभी उसे डांटा नहीं।
भाग 6: मानव का दर्द
मानव को धीरे-धीरे अहसास होने लगा कि वह इस घर का हिस्सा नहीं है। एक दिन उसने रमन से कहा —
“पापा… क्या मैं यहां रह सकता हूं? अगर नहीं, तो मैं चला जाऊंगा।”
रमन की आंखों से आंसू गिर पड़े। उसने मानव को गले से लगा लिया।
इधर, कावेरी भी धीरे-धीरे बदल रही थी। उसने देखा कि मानव कितनी मासूमियत से घर के कामों में मदद करता है और बच्चों से प्यार करता है।
एक दिन अंशु बीमार पड़ गया। डॉक्टर ने कहा कि उसका खून बदलना पड़ेगा। उसके ब्लड ग्रुप से कोई मेल नहीं खा रहा था। जब मानव का टेस्ट हुआ, तो वही मैच कर गया।
मानव ने बिना एक पल सोचे अंशु के लिए खून दिया।
भाग 7: परिवार का हिस्सा
उस दिन के बाद, कावेरी ने मानव को अपने पास बुलाया और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा —
“तुम अब हमारे बेटे हो।”
मानव की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले।
घर में अब चारों बच्चे जैसे खुशी-खुशी रहने लगे। रमन ने कावेरी का हाथ थामकर कहा —
“शुक्रिया… मुझे माफ कर दो।”
कावेरी ने मुस्कुराते हुए कहा —
“ये मासूम है। इसे प्यार देना हमारा फर्ज़ है।”